उठो हवा धरती से आसमान की ओर बहो बहो कि तुम्हारी तासीर है यहकुलबुला रहे हैं बीजले चलो बिखेर दो इस धरती के कोने-कोने में विचारों की काटना चाहता हूँ फसल तुम्हारे अंतस की पीड़ा चाहता हूँ बांटना आग बनकर फैल जाना चाहते हैं बीज. लेबल: जीवन, परिवर्तन, प्रगति, विचार, संघर्ष