गुरुवार, 13 नवंबर 2008

बीज

उठो हवा
धरती से आसमान की ओर बहो
बहो कि तुम्हारी तासीर है यह

कुलबुला रहे हैं बीज
ले चलो
बिखेर दो
इस धरती के कोने-कोने में

विचारों की काटना चाहता हूँ फसल
तुम्हारे अंतस की पीड़ा
चाहता हूँ बांटना

आग बनकर
फैल जाना चाहते हैं बीज.

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