सोमवार, 24 नवंबर 2008

सामंजस्य

तुम्हारा मुस्कुराना इस तरह
दिल में हलचल पैदा करता है
मानो
हरी-हरी कोंपलें निकलने
के लिए आतुर हों
और मैं उस पौध को
सींच रहा हूँ अनवरत
ताकि
कोंपलें निकलती रहें
लगातार, लगातार।

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14 टिप्पणियाँ:

यहां 28 नवंबर 2008 को 10:14 am, Blogger Ashok Kumar pandey ने कहा…

बहादुर भाई ,
कमाल की भाषा है यार... मज़ा आ गया .. बधाई

 
यहां 30 नवंबर 2008 को 5:05 am, Blogger PREETI BARTHWAL ने कहा…

बहुत ही सुन्दर

 
यहां 1 दिसंबर 2008 को 4:58 am, Blogger Poonam Agrawal ने कहा…

bahut achcha likha hai ....muskrahat ko itni behter tarike se pesh kiya hai ....
keep it up...

 
यहां 1 दिसंबर 2008 को 8:48 pm, Blogger sandhyagupta ने कहा…

Bahut khub likha hai aapne. Badhai.

 
यहां 2 दिसंबर 2008 को 3:41 am, Blogger रजनीश 'साहिल ने कहा…

बहादुर भाई,

जब भी आपकी कवितायें पढ़ी हैं या सुनी हैं सिवा बेहतरीन के और कोई शब्द सूझा नहीं। जिसे कहना भी हमेशा नाकाफी लगा। अरसा हुआ कि आपसे मुलाक़ात नहीं हुई बहरहाल अब इस संचार के नए माध्यम से मुलाक़ात होती रहेगी।

इस बार भी आपके शब्द-चित्रों पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने के लिए मैं मौन ही रहूँगा।

 
यहां 2 दिसंबर 2008 को 10:49 am, Blogger Bahadur Patel ने कहा…

sahil bhai shukriya.ab mulakat hoti rahegi. kuchh kavitayen jald hi dalane wala hoon.
main santur nahin bajata.blog par maine apani pasand ki rachanayen post kar raha hoon.

 
यहां 6 दिसंबर 2008 को 12:48 am, Blogger रंजना ने कहा…

Waah ! sundar.

 
यहां 8 दिसंबर 2008 को 7:46 pm, Blogger seema gupta ने कहा…

सींच रहा हूँ अनवरत
ताकि
कोंपलें निकलती रहें
लगातार, लगातार।
" बहुत नाजुक जज्बातों की अभिव्यक्ति, अति सुंदर"

regards

 
यहां 9 दिसंबर 2008 को 6:02 am, Blogger Dr.Bhawna ने कहा…

एक अलग तरह की रचना पढ़ने को मिली ...बहुत खूब...

 
यहां 9 दिसंबर 2008 को 9:33 am, Blogger परमजीत सिहँ बाली ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना है।बधाई स्वीकारें।

 
यहां 11 दिसंबर 2008 को 8:22 pm, Blogger Bahadur Patel ने कहा…

ashokji, preetiji, poonamji, sandhyaji, sahilji, ranjanaji, simaji, bhawanaji, paramji aap sabhi mere blog par aye aur apani tippani di. mujhe achchha laga, apane kavita padhi. mujhe taqat di aap sabhi ka dhanywad.aage bhi isi tarah mouse ko clic karake ki bord par apani ungliyon se virajen.

 
यहां 12 दिसंबर 2008 को 1:20 pm, Blogger Alpana Verma ने कहा…

wah!kya baat hai,bahut hi sundar !

 
यहां 27 दिसंबर 2008 को 8:45 pm, Blogger SAHITYIKA ने कहा…

very nice imagination.. :)

 
यहां 1 जनवरी 2009 को 9:49 am, Blogger Bahadur Patel ने कहा…

alpana ji, sahityika ji aap logon ne tippani ki aapaka bahut dhanywaad.

 

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